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आधार ऑफ़लाइन सत्यापन के लिए 100 संस्थाओं को जोड़ा गया: UIDAI

आधार ऑफ़लाइन सत्यापन

आधार ऑफ़लाइन सत्यापन

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार-आधारित ऑफ़लाइन सत्यापन शुरू होने के तीन महीनों के भीतर 100 संस्थाओं को ‘ऑफ़लाइन सत्यापन चाहने वाली संस्थाओं’ (OVSEs) के रूप में अपने साथ जोड़ा है।

मंत्रालय ने इस उपलब्धि को सुरक्षित, सहमति-आधारित और कागज़-रहित पहचान सत्यापन को संभव बनाने की दिशा में एक कदम बताया, जिससे सेवा प्रदाताओं और नागरिकों, दोनों को लाभ होगा।

मंत्रालय के अनुसार, इन जोड़ी गई संस्थाओं में कई तरह के क्षेत्र शामिल हैं, जैसे केंद्र और राज्य सरकार के विभाग, फिनटेक कंपनियाँ, हॉस्पिटैलिटी और इवेंट मैनेजमेंट संगठन, शैक्षणिक और परीक्षा निकाय, तथा पहचान और कार्यबल सत्यापन एजेंसियाँ।

इन संस्थाओं को आधार ऑफ़लाइन सत्यापन इकोसिस्टम में जोड़ने से सेवा वितरण में लगने वाले समय में सुधार होने, काम-काज की जटिलता कम होने और कागज़ी दस्तावेज़ों को संभालने तथा मैन्युअल सत्यापन से जुड़ी लागत में कमी आने की उम्मीद है।

मंत्रालय ने कहा कि यह पहल आधार-सक्षम डिजिटल सत्यापन ढाँचों में बढ़ते भरोसे को दर्शाती है, जो उपयोगकर्ता की सहमति और निजता को प्राथमिकता देते हैं।

इस प्रणाली के तहत, आधार धारक QR कोड-आधारित सत्यापन और डिजिटल रूप से हस्ताक्षरित दस्तावेज़ों का उपयोग करके अपनी पहचान से जुड़ा सीमित डेटा साझा कर सकते हैं; इसके लिए UIDAI के केंद्रीय डेटाबेस तक वास्तविक समय में पहुँच की आवश्यकता नहीं होती।

अधिकारियों ने बताया कि यह तरीका व्यक्तियों को अपनी निजी जानकारी पर नियंत्रण बनाए रखने की सुविधा देता है, क्योंकि वे केवल उतना ही डेटा साझा करते हैं जितना न्यूनतम रूप से आवश्यक है; इससे अधिक निजता और पारदर्शिता सुनिश्चित होती है।

मंत्रालय ने कहा, “सत्यापन की यह सरल प्रक्रिया जटिलता को कम करती है और पारदर्शी तथा सहमति-आधारित संवादों के माध्यम से विश्वास पैदा करती है।”

इस प्रणाली की वितरित प्रकृति को इस तरह से डिज़ाइन किया गया है कि यह इसकी मापनीयता (scalability), मज़बूती और सुरक्षा को बढ़ा सके; यह भारत के ‘समावेशी डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढाँचा’ बनाने के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

इस पहल से ‘जीवन की सुगमता’ (Ease of Living) में भी सुधार होने की उम्मीद है, क्योंकि यह तेज़ी से ऑनबोर्डिंग को संभव बनाती है, कागज़ी कार्यवाही को कम करती है और नागरिकों तथा सेवा प्रदाताओं के बीच संवाद को सरल बनाती है।

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