प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को एशियाई पैरा खेलों में 114 पदक जीतने पर भारतीय दल को बधाई दी। उन्होंने खिलाड़ियों से कहा कि वे अपनी इस सफलता को आधार बनाकर लॉस एंजिल्स 2028 की तैयारियों में जुट जाएं।
खिलाड़ियों से बातचीत करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उनके प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि भारत एक बड़ी खेल शक्ति के रूप में उभर रहा है। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के इस प्रदर्शन ने करोड़ों देशवासियों का दिल जीत लिया है।
उन्होंने खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा, “आइची-नागोया का पोडियम आपकी यात्रा की अंतिम मंजिल नहीं है।” उन्होंने खिलाड़ियों को सलाह दी कि वे इस उपलब्धि को बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एक शुरुआती कदम (लॉन्चिंग पैड) के रूप में इस्तेमाल करें।
प्रधानमंत्री ने बताया कि भारतीय दल ने 30 स्वर्ण, 35 रजत और 49 कांस्य पदक जीते। इसके साथ ही, उन्होंने पांच विश्व रिकॉर्ड और नौ एशियाई रिकॉर्ड भी बनाए। उन्होंने 2010 के एशियाई पैरा खेलों का जिक्र करते हुए बताया कि तब भारत ने कुल 14 पदक जीते थे, जिनमें केवल एक स्वर्ण पदक शामिल था।
उन्होंने कहा कि 14 से 114 पदकों तक का यह सफर खिलाड़ियों के समर्पण और देश में एक मजबूत खेल इकोसिस्टम (खेल परिवेश) के विकास को दर्शाता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि 56 महिला खिलाड़ियों में से 34 ने पदक जीते। इसके अलावा, चार स्पर्धाओं में तो भारत ने पोडियम की तीनों शीर्ष जगहें (स्वर्ण, रजत और कांस्य) अपने नाम कर लीं। प्रतियोगिता के आखिरी दिन भी भारतीय दल ने नौ स्वर्ण पदक जीते।
उन्होंने बताया कि एशियाई पैरा खेलों में पहली बार हिस्सा लेने वाले 61 भारतीय खिलाड़ियों में से 36 ने पदक जीते। उन्होंने यह भी बताया कि संदीप ने अपने पहले ही प्रयास में विश्व रिकॉर्ड बना दिया।
प्रधानमंत्री ने पैरा-शूटिंग में विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए मोना अग्रवाल की तारीफ की, और हनी की भी सराहना की जिन्होंने अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ा। उन्होंने हिमांशु, रवि और जेहान के शानदार प्रदर्शन को भी सराहा।
प्रधानमंत्री मोदी ने रिंकू का जिक्र किया, जिन्होंने खेलों से दो महीने पहले अपनी मां को खो दिया था, लेकिन फिर भी स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने कहा कि रिंकू का अपनी मां की तस्वीर हाथ में लेकर उन्हें अपना पदक समर्पित करना, पूरे देश को भावुक कर गया।
उन्होंने खिलाड़ियों के परिवारों, प्रशिक्षकों और कोचों को भी बधाई दी। उन्होंने खिलाड़ियों की इन उपलब्धियों के पीछे उनकी लगातार मेहनत और पैरा-एथलीटों को अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने में आने वाली विशेष चुनौतियों को भी रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने उन कमियों को दूर करने के लिए काम किया है—जैसे संसाधनों की कमी, सीमित समर्थन और पारदर्शिता का अभाव—जिनकी वजह से पहले कई परिवार अपने बच्चों को खेल के क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रोत्साहित करने से हिचकिचाते थे। उन्होंने कहा कि युवा खिलाड़ियों को अब इस बात का ज़्यादा भरोसा है कि देश उनकी प्रतिभा का समर्थन करेगा; उन्होंने तीरंदाजी, एथलेटिक्स, शूटिंग, तैराकी, टेबल टेनिस, बैडमिंटन, जूडो और पावरलिफ्टिंग जैसे खेलों में सामने आए चैंपियनों की ओर इशारा किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि खेल चरित्र-निर्माण और राष्ट्र-निर्माण का एक माध्यम हैं, जो अनुशासन, टीम वर्क और हार से उबरने की क्षमता सिखाते हैं।
उन्होंने जमीनी स्तर की पहलों, ‘खेलो इंडिया सेंटर्स’ और ‘टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम’ (TOPS) का जिक्र करते हुए बताया कि ये एक आधुनिक खेल इकोसिस्टम का हिस्सा हैं, जिसमें पैरा-स्पोर्ट्स को भी समान महत्व दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि TOPS समर्थित एथलीटों ने इन खेलों में 41 पदक जीते, जबकि ‘खेलो इंडिया’ के एथलीटों ने 19 पदक हासिल किए।
खेल प्रतियोगिताओं से इतर अन्य अवसरों की बात करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने खेल बुनियादी ढांचे, उपकरणों के निर्माण और प्रसारण (ब्रॉडकास्टिंग) के क्षेत्र में हो रही वृद्धि पर प्रकाश डाला। उन्होंने हाल ही में मंजूर की गई ‘खेलो इंडिया स्पोर्ट्स गुड्स मैन्युफैक्चरिंग स्कीम’ का जिक्र किया, जिसका बजट 1,800 करोड़ रुपये से अधिक है।
प्रधानमंत्री मोदी ने निर्माताओं से भारतीय और अंतरराष्ट्रीय एथलीटों के लिए विश्व स्तरीय उपकरण, कपड़े और जूते बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतीय खेल उत्पादों की वैश्विक मांग बढ़ने से MSME (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) को बढ़ावा मिलेगा और छोटे शहरों तथा ग्रामीण इलाकों में नए अवसर पैदा होंगे।
प्रधानमंत्री ने एथलीटों को शैक्षणिक संस्थानों में जाने और वहां छात्रों के साथ अपने खेल के अनुभवों के साथ-साथ खेल के मैदान से बाहर करियर बनाने के बारे में जानकारी साझा करने के लिए प्रोत्साहित किया।
उन्होंने दिव्यांगजनों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में भी बताया। इनमें पेंशन राशि में बढ़ोतरी, पात्रता के लिए दिव्यांगता की सीमा को 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत करना, और पात्र बच्चों को जन्म से ही पेंशन मिलने की व्यवस्था शामिल है।
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘भारतीय सांकेतिक भाषा’ (Indian Sign Language) को बढ़ावा देने के प्रयासों पर जोर दिया। इसमें 10,000 से अधिक शब्दों का शब्दकोश तैयार करना, स्कूली पाठ्यपुस्तकों को सांकेतिक भाषा में उपलब्ध कराना और ‘एक्सेसिबल इंडिया कैंपेन’ (सुगम्य भारत अभियान) के तहत सार्वजनिक स्थानों तक पहुंच को आसान बनाना शामिल है।
उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य दिव्यांगजनों के लिए सम्मान और समान अवसर सुनिश्चित करना है।
LA 2028 (लॉस एंजिल्स 2028) खेलों की ओर देखते हुए, प्रधानमंत्री ने बताया कि अवनि और मनीष ने पहले ही अपना कोटा हासिल कर लिया है। उन्होंने भारत की ओर से और अधिक भागीदारी और ज्यादा पदक जीतने की उम्मीद जताई।
उन्होंने एथलीटों से कहा कि वे दिवाली के दौरान अपनी उपलब्धियों का जश्न मनाएं, साथ ही नए लक्ष्य तय करें और अपनी अगली चुनौती के लिए तैयारी शुरू कर दें।
इस बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया और रक्षा खडसे के साथ-साथ ‘पैरालंपिक कमिटी ऑफ इंडिया’ और विभिन्न राष्ट्रीय खेल महासंघों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
