भारत ने FY26 में रिकॉर्ड 6.05 GW पवन ऊर्जा क्षमता जोड़ी, कुल स्थापित क्षमता 56 GW के पार पहुंची।
भारत ने वित्त वर्ष 2025-26 में 6.05 गीगावॉट (GW) की अब तक की सबसे ज़्यादा सालाना पवन ऊर्जा क्षमता वृद्धि दर्ज की है, जो देश की नवीकरणीय ऊर्जा यात्रा में एक अहम मील का पत्थर है।
यह ताज़ा वृद्धि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 46 प्रतिशत की तेज़ बढ़ोतरी दिखाती है, जो ज़मीन पर पवन ऊर्जा लगाने की गति में मज़बूत तेज़ी का संकेत है। इसके साथ ही, भारत की कुल स्थापित पवन ऊर्जा क्षमता 56 GW से ज़्यादा हो गई है, जिससे दुनिया के अग्रणी पवन ऊर्जा बाज़ारों में इसकी स्थिति और मज़बूत हुई है।
यह बढ़ोतरी नीतिगत समर्थन, बेहतर ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर और परियोजनाओं की एक मज़बूत पाइपलाइन के मेल से हुई है। गुजरात, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे प्रमुख राज्यों ने इस क्षमता वृद्धि में बड़ी भूमिका निभाई है, जिसे पवन-सौर हाइब्रिड परियोजनाओं के विस्तार और हरित ऊर्जा ओपन एक्सेस पहलों से समर्थन मिला है।
नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय ने इस रिकॉर्ड बढ़ोतरी का श्रेय सरकार के लगातार हस्तक्षेपों को दिया है, जैसे कि पवन टरबाइन के पुर्ज़ों पर रियायती सीमा शुल्क, 2028 तक अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन सिस्टम (ISTS) शुल्कों में छूट, प्रतिस्पर्धी बोली तंत्र और पवन ऊर्जा के लिए समर्पित नवीकरणीय खपत दायित्व ढाँचे।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ़ विंड एनर्जी से मिले तकनीकी सहयोग ने भी इस क्षेत्र के विकास और कार्यान्वयन क्षमताओं को मज़बूत करने में योगदान दिया है।
इस मील के पत्थर से भारत के नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो को काफ़ी बढ़ावा मिलने और 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित ऊर्जा क्षमता हासिल करने के इसके महत्वाकांक्षी लक्ष्य को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
भारत का पवन ऊर्जा कार्यक्रम, जो 1990 के दशक की शुरुआत में शुरू हुआ था, अब एक परिपक्व और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र बन गया है, जिसे एक मज़बूत नीतिगत ढाँचे और निवेशकों के बढ़ते भरोसे का समर्थन प्राप्त है।

