राष्ट्रपति ने शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए; भारत को ‘स्किल कैपिटल’ और ‘नॉलेज सुपरपावर’ बनाने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आज शिक्षक दिवस पर राष्ट्रीय राजधानी में आयोजित एक समारोह में देश भर के शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किए। इस मौके पर राष्ट्रपति ने कहा कि देश के विकास में शैक्षणिक उत्कृष्टता, कौशल विकास और उद्यमिता का बहुत महत्व है। साथ ही, भारत को दुनिया की कौशल राजधानी बनाना और इसे ज्ञान के क्षेत्र में महाशक्ति के रूप में बदलना हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने कहा कि शिक्षा हमारे संविधान में निहित ‘समान अवसर’ के आदर्श को साकार करने का सबसे प्रभावी माध्यम है। राष्ट्रपति सचिवालय की एक विज्ञप्ति के अनुसार, राष्ट्रपति ने प्राथमिक स्कूलों में बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर को नगण्य स्तर तक लाने में मदद करने के लिए शिक्षकों की सराहना की और कहा कि उनकी कोशिशों ने इस राष्ट्रीय सफलता में योगदान दिया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि स्कूली शिक्षा ही शिक्षा प्रणाली की नींव होती है। राष्ट्रपति ने कहा, “ज्ञान और कौशल तो कभी भी हासिल किए जा सकते हैं, लेकिन बचपन में अच्छे आचरण की सीख देना कहीं अधिक प्रभावी होता है। शुरुआती कक्षाओं में बच्चों के बौद्धिक, शारीरिक और नैतिक विकास पर ध्यान केंद्रित करके शिक्षक बेहतरीन छात्रों और कर्तव्यनिष्ठ नागरिकों की भावी पीढ़ी तैयार कर सकते हैं।”
राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि कई छात्र आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं, कुछ पहली पीढ़ी के सीखने वाले होते हैं, कुछ साधारण ग्रामीण स्कूलों से बड़े शहरों के स्कूलों में आते हैं, कुछ स्वभाव से शर्मीले होते हैं, कुछ में अपार प्रतिभा होने के बावजूद आत्मविश्वास की कमी होती है, और कुछ विशेष जरूरतों वाले बच्चे होते हैं। ऐसे में, शिक्षकों की यह विशेष जिम्मेदारी है कि वे उनमें आत्मविश्वास जगाएं और उन सभी छात्रों को आगे बढ़ाएं जो किसी भी कारण से खुद को कमतर महसूस करते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि हम ‘विकसित भारत’ बनाने के लक्ष्य की ओर बढ़ रहे हैं और यह लक्ष्य केवल विश्व-स्तरीय शिक्षा प्रणाली के माध्यम से ही हासिल किया जा सकता है।
राष्ट्रपति ने कहा, “हमारे शिक्षक शिक्षा प्रणाली में जान फूंकते हैं। हमें यह सुनिश्चित करने का प्रयास करना चाहिए कि हमारे देश में कोई भी छात्र गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के अवसरों से वंचित न रहे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हमारे शिक्षकों को अपने स्नेह और समर्पण के माध्यम से सभी छात्रों में ज्ञान, प्रेरणा, नैतिकता और संवेदनशीलता का संचार करना चाहिए।”


